[Preview books] [Borrow books] [Pause] जिस किसीने भी ChatGPT, Gemini, या ऐसी किसी अन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ काम कियाहै, उसे शायद ऐसा लगाहोगा कि वे वास्तवमें समझतीहैं। एक AI हमारे साथ लगभग एक सामान्य इंसानकी तरह संवाद करतीहै। वह मज़ाक करतीहै, और हमारे व्यंग्यपूर्ण कथनों तथा छोटी-मोटी आपत्तियोंपर भी इंसानोंकी तरह प्रतिक्रिया देतीहै।यदि आप उससे अपने व्याख्यानके लिए प्रस्तुति स्लाइड तैयार करनेके लिए कहें, तो वह शायद आपसे भी बेहतर काम करदे। मैंने तो यहभी सुनाहै कि बहुतसे विद्यार्थी अपने स्कूल और कॉलेजके assignment भी AI से ही करवाने लगेहैं।तो फिर, क्या यह स्पष्ट नहींहै कि वे चीज़ोंको समझतीहैं? बिल्कुल नहीं। इसका कारण यहहै कि आजकी AI प्रणालियाँ जिस प्रकार बनाई गईहैं, वही ऐसा है। वास्तवमें उनमें किसी भी चीज़को समझनेकी क्षमता ही नहीं होती।एक AI मूल रूपसे यही करतीहै—आपने जो कहाहै, या उसे पहले जो सिखायागयाहै, उसके आधारपर वह केवल pattern matching करतीहै और यह अनुमान लगातीहै कि आपके प्रश्नका सबसे उपयुक्त उत्तर क्या होसकताहै।वैसे यह उतनी बुरी बात भी नहींहै। आखिर हममेंसे बहुतसे लोग भी यही करतेहैं। अधिकांश लोग pattern matching और अनुमान लगानेवाली मशीनोंकी तरह ही काम करतेहैं। हम किसी बातको गहराईसे समझनेका प्रयास बहुत कम करतेहैं।तो फिर, वास्तविक समझमें क्या-क्या शामिल होताहै?बहुत सरल शब्दोंमें कहें, तो इसका अर्थ है किसी नए शब्दको किसी ऐसी चीज़से जोड़ना जिसे हम पहलेसे जानतेहैं। या दूसरे शब्दोंमें, किसी नए शब्दका अर्थ उस चीज़की सहायतासे समझना जो हमें पहलेसे परिचित है।लेकिन यह जुड़ाव केवल शब्दोंतक सीमित नहीं होता। यह उससे कहीं आगे जासकताहै।उदाहरणके लिए, जैसे ही कोई "बिल्ली" शब्द कहताहै, हमारा मन उस शब्दको एक मुलायम, रोएँदार जीवसे जोड़ देताहै, जिसके चार पैर होतेहैं, एक लंबी पूँछ होतीहै, और जो कभी-कभी गुनगुनाने जैसी आवाज़ निकालतीहै। वास्तवमें हम किसी शब्दको उस जीवके पूरे विवरणसे जोड़तेहैं जिसका वह प्रतिनिधित्व करताहै।हमारी समझ केवल दृश्य अनुभवतक भी सीमित नहीं होती।यदि आप कभी दक्षिण-पूर्व एशियाके कुछ देशोंमें गएहों, तो केवल "ड्यूरियन" शब्द सुनतेही अनेक बातें आपके मनमें आसकतीहैं—उसकी तीखी गंध, जो लगभग मतली पैदा करसकतीहै, और फिरभी उसका ...
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