エピソード

  • काव्य पाठ — “पुरु–उर्वशी संवाद : विरह में रचा जीवन”,
    2026/01/21

    इस साप्ताहिक अंक में सुरता साहित्य की धरोहर प्रस्तुत करता है एक विचारोत्तेजक और भावप्रवण काव्य पाठ
    “पुरु–उर्वशी संवाद : विरह में रचा जीवन”,
    रचनाकार आदर्श उज्जवल उपाध्याय (लखनऊ)

    यह कविता पौराणिक कथा के माध्यम से मानव जीवन के गहरे दर्शन को उद्घाटित करती है। पुरु और उर्वशी के संवाद के जरिए रचना देवत्व और मानवता, अमरता और नश्वरता, विलास और तपस्या जैसे द्वंद्वों को अत्यंत सरल और संवेदनशील भाषा में प्रस्तुत करती है। एक ओर पुरु पृथ्वी लोक के संघर्ष, पीड़ा और सीमित जीवन की यथार्थ तस्वीर रखते हैं, वहीं उर्वशी नारीत्व को सृजन, तप और प्रेम की सर्वोच्च अवस्था मानते हुए पृथ्वी पर जीवन को स्वीकार करती हैं।

    यह काव्य नारी बनने के गौरव, मानव प्रेम की तपस्या और जीवन की सार्थकता पर गहन विमर्श करता है। विरह, करुणा और आत्मबोध से भरी यह रचना श्रोताओं को सोचने पर विवश करती है कि वास्तविक सुख अमरत्व में नहीं, बल्कि संघर्षों से भरे मानवीय जीवन को पूरी चेतना से जीने में है।

    सुरता साहित्य की धरोहर का यह अंक कविता प्रेमियों और विचारशील श्रोताओं के लिए एक भावनात्मक और दार्शनिक अनुभव है।

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    7 分
  • चित्र और प्रेम की शाश्वत सार्थकता
    2026/01/14

    इस साप्ताहिक प्रस्तुति में सुरता साहित्य की धरोहर के अंतर्गत प्रस्तुत है लघु व्यंग्य आलेख “चित्र अथवा फोटो की सार्थकता” — लेखक डॉ. अर्जुन दुबे की एक विचारोत्तेजक रचना। यह आलेख मानवीय मनोविज्ञान और सौंदर्यबोध के उस पहलू को उजागर करता है, जहाँ व्यक्ति केवल एक चित्र, आकृति या फोटो को देखकर ही प्रेम, आकर्षण और कल्पना की दुनिया में प्रवेश कर जाता है।

    लेखक कालिदास की काव्य परंपरा और पौराणिक उदाहरणों के माध्यम से यह स्पष्ट करते हैं कि बाह्य सौंदर्य का प्रभाव युगों से मानव जीवन में बना हुआ है। प्राचीन चित्रकला से लेकर आधुनिक फोटोग्राफी तक, रूप और छवि आज भी सामाजिक संबंधों, विशेषकर वैवाहिक चयन और मानवीय आकर्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    यह व्यंग्य रचना केवल रूप-सौंदर्य पर ही नहीं ठहरती, बल्कि यह भी संकेत देती है कि सच्चा सौंदर्य शरीर तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह आत्मा को स्पर्श करने वाली गहन अनुभूति है। हास्य और चिंतन के संतुलन के साथ यह आलेख पाठकों और श्रोताओं को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है।

    यह एपिशोड साहित्य और कला की उस अमर शक्ति को नमन करता है, जो किसी व्यक्ति, विचार या चरित्र को समय के पार स्थायी बना देती है।

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    14 分
  • व्यंग्य: दिल का इलाज, रामबाण उपाय-डॉ.विनोद नायक
    2026/01/07

    आज की कड़ी में सुरता साहित्य की धरोहर अपनी दैनिक यात्रा से आगे बढ़ते हुए साप्ताहिक स्वरूप में प्रवेश करती है। इस विशेष गुरुवार प्रस्तुति में हम लेकर आए हैं प्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ. विनोद नायक द्वारा रचित व्यंग्य आलेख “दिल का इलाज, रामबाण उपाय” का रोचक व प्रभावशाली वाचन।

    यह व्यंग्य हास्य के आवरण में आधुनिक समाज की संवेदनहीनता, संवादहीनता और भावनात्मक उलझनों पर तीखा प्रहार करता है। गजबी लाल और डॉक्टर के बीच होने वाला संवाद हमें यह सोचने पर विवश करता है कि क्या दिल की बीमारी केवल शारीरिक होती है या फिर रिश्तों और भावनाओं की अनदेखी से भी जन्म लेती है।

    सरल भाषा, चुटीले संवाद और स्थितिजन्य हास्य के माध्यम से यह रचना न केवल हँसाती है, बल्कि मानवीय अनुभूतियों की गहराई से परिचित कराती है। यह एपिशोड साहित्य प्रेमियों के साथ-साथ उन सभी श्रोताओं के लिए है, जो हास्य के साथ जीवन की सच्चाइयों को समझना चाहते हैं।

    सुनिए, मुस्कुराइए और सोचिए —
    क्योंकि कभी-कभी व्यंग्य ही सबसे सटीक इलाज होता है।

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    12 分
  • सरसी छंद के शास्त्रीय विधान एवं प्रयोग
    2026/01/03

    इस ज्ञानवर्धक चर्चा में सरसी छंद के शास्त्रीय विधान और उसके विविध भाषाई स्वरूपों का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया गया है। यह छंद लोक और शास्त्र के सुंदर समन्वय का उदाहरण है, जो भोजपुरी होली गीतों से लेकर छत्तीसगढ़ के राउत नाचा दोहों तक व्यापक रूप से प्रचलित रहा है।

    एपिसोड में बताया गया है कि सरसी छंद एक मात्रिक छंद है, जिसकी प्रत्येक पंक्ति में कुल 27 मात्राएँ होती हैं। इसके विषम चरण चौपाई की तरह 16 मात्राओं के और सम चरण दोहा शैली में 11 मात्राओं के होते हैं। इस संरचना के कारण छंद में लय, प्रवाह और गेयता स्वतः उत्पन्न होती है।

    चर्चा के दौरान उदाहरणों के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि सरसी छंद का प्रयोग केवल लोकगीतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से सामाजिक विसंगतियाँ, पारिवारिक दायित्व, नैतिक मूल्य और राष्ट्रप्रेम जैसे गंभीर विषय भी प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किए गए हैं।

    यह एपिसोड हिंदी और छत्तीसगढ़ी साहित्य की साझा काव्य परंपरा को समझने, सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सार्थक प्रयास है, जो लोकछंदों की जीवंतता और प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।

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    11 分
  • विचारोत्तेजक छत्तीसगढ़ी कहानी — “शब्दभेदी बाण”,
    2025/12/29

    आज के सुरता कहानी वाचन में प्रस्तुत है छत्तीसगढ़ी कथा “शब्दभेदी बाण” — लेखक चन्द्रहास साहू की एक सशक्त और संवेदनशील रचना।

    यह कहानी नए समय की सामाजिक सच्चाइयों को सामने लाती है, जहाँ पारंपरिक रिश्तों की ऊष्मा और आधुनिक अपेक्षाओं का टकराव स्पष्ट दिखाई देता है। ननद–भौजी की तकरार, भाई–बहन के अटूट स्नेह और दहेज की बदलती मानसिकता के बीच कहानी का नायक अँजोर एक ऐसे व्यक्ति के रूप में उभरता है, जो कला, श्रम और त्याग के सहारे परिवार की जिम्मेदारियों को निभाता है।

    “शब्दभेदी बाण” केवल एक कथा नहीं, बल्कि यह प्रश्न है —
    क्या आज भी वचन, शब्द और नैतिकता समाज की विसंगतियों को भेद पाने में सक्षम हैं?
    या फिर सबसे गहरा आघात अपनों से ही मिलता है?

    लोककला, पारिवारिक संवेदना, सामाजिक विडंबना और मानवीय करुणा से बुनी यह कहानी श्रोताओं को भीतर तक झकझोरती है और सोचने के लिए विवश करती है।

    सुरता के साथ जुड़िए और सुनिए —
    छत्तीसगढ़ की माटी से निकली
    एक सशक्त, मार्मिक और समय से संवाद करती कहानी।

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    23 分
  • काव्य पाठ में: प्रो. रविन्द्र प्रताप सिंह की एक चर्चित हास्य नज़्म
    2025/12/25

    सुरता साहित्य की धरोहर के अंतर्गत आज की यह प्रस्तुति श्रोताओं को साहित्य के उस पक्ष से रू-बरू कराती है, जहाँ हास्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन की सच्चाइयों का सधा हुआ व्यंग्य बन जाता है। आज के काव्य पाठ में प्रस्तुत है प्रो. रविन्द्र प्रताप सिंह की एक चर्चित हास्य नज़्म, जो नाई की दुकान जैसे साधारण दृश्य को केंद्र में रखकर मानवीय अहंकार, समय की अनिवार्यता और इच्छाओं के क्षरण को अत्यंत रोचक ढंग से अभिव्यक्त करती है।

    उस्तरा, कैंची, जुल्फ़ें और आईना—ये सभी प्रतीक बनकर जीवन की उस सच्चाई की ओर संकेत करते हैं, जहाँ हर अकड़ और हर मोह अंततः समय के सामने झुक जाता है। नज़्म में हास्य के साथ-साथ एक सूक्ष्म दर्शन भी निहित है, जो श्रोताओं को मुस्कराते हुए आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है।

    इस काव्य पाठ को और भी विशेष बनाती है इसकी प्रस्तुति, क्योंकि इस हास्य नज़्म का वाचन स्वयं प्रो. रविन्द्र प्रताप सिंह की आवाज़ में किया गया है। उनकी सहज, लयात्मक और भावपूर्ण अभिव्यक्ति शब्दों को जीवंत कर देती है और श्रोताओं को एक आत्मीय साहित्यिक अनुभव प्रदान करती है।

    यह एपिसोड उन सभी श्रोताओं के लिए है जो साहित्य में केवल गंभीरता ही नहीं, बल्कि मुस्कान, व्यंग्य और जीवन की हल्की-सी चुभन को भी महसूस करना चाहते हैं।

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    6 分
  • घनाक्षरी छंद रचना कला
    2025/12/26

    सुरता साहित्य की धरोहर | साहित्य सृजन कला (शनिवार)

    इस ज्ञानवर्धक एपिसोड में हम हिंदी साहित्य के स्वर्णयुग के अत्यंत लोकप्रिय और प्रभावशाली घनाक्षरी छंद का विस्तृत परिचय प्रस्तुत करते हैं। यह सत्र उन रचनाकारों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो कविता को केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि एक अनुशासित काव्य-शिल्प के रूप में समझना चाहते हैं।

    लेखक रमेश चौहान द्वारा प्रस्तुत इस मार्गदर्शिका में घनाक्षरी छंद की वर्णिक संरचना को सरल और व्यावहारिक भाषा में समझाया गया है। एपिसोड में घनाक्षरी के प्रमुख प्रकार — मनहरण, रूप और देवघनाक्षरी — का विस्तार से विवेचन किया गया है, साथ ही छंद लेखन के लिए आवश्यक वर्ण-गणना, लघु–गुरु मात्राओं का निर्धारण, यति और गति जैसे तकनीकी नियमों को स्पष्ट किया गया है।

    इस चर्चा को और अधिक उपयोगी बनाने के लिए तुलसीदास एवं अन्य प्रसिद्ध कवियों के उदाहरणों के साथ-साथ स्वयं अभ्यास करने की विधि भी साझा की गई है, जिससे नवोदित कवि छंद लेखन में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।

    यह एपिसोड पारंपरिक काव्य कला को आधुनिक समय में संरक्षित रखने और नई पीढ़ी के रचनाकारों को छंदबद्ध कविता की ओर प्रेरित करने का एक सार्थक प्रयास है।

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    16 分
  • भारत रत्न अटल: कवि, राजनेता और राष्ट्रनिर्माता के जन्म दिवस पर विशेष काव्यपाठ
    2025/12/24

    सुरता साहित्य की धरोहर के इस विशेष प्रसंग में हम स्मरण कर रहे हैं
    भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री
    आदरणीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के प्रेरणादायी जीवन और अविस्मरणीय योगदान को।

    यह प्रस्तुति
    डॉ. अशोक आकाश द्वारा
    अटल जी के शून्य से शिखर तक के संघर्षपूर्ण जीवन–सफ़र,
    उनकी कवि-हृदय संवेदना,
    लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता
    और छत्तीसगढ़ राज्य निर्माता के रूप में उनके ऐतिहासिक योगदान को
    सफ़रनामा एवं काव्य पाठ के माध्यम से रेखांकित करती है। अटल जी केवल एक राजनेता नहीं थे, वे विचार, संवाद और राष्ट्रबोध के प्रतीक थे। उनकी कविता, उनकी वाणी और उनका आचरण आज भी भारत की आत्मा को दिशा देता है। यह एपिसोड नई पीढ़ी को नेतृत्व, संवेदना और राष्ट्रप्रेम के उच्च आदर्शों से जोड़ने का एक विनम्र प्रयास है।

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    19 分