『एकादशोपनिषद प्रसाद』のカバーアート

एकादशोपनिषद प्रसाद

एकादशोपनिषद प्रसाद

著者: रमेश चौहान
無料で聴く

“एकादशोपनिषद प्रसाद” श्रृंखला 11 प्राचीनतम और महत्वपूर्ण उपनिषदों के गहन ज्ञान को सरल और सुलभ भाषा में प्रस्तुत करने का एक प्रयास है। इस श्रृंखला का उद्देश्य इन उपनिषदों के गूढ़ दार्शनिक विचारों को समझने और आत्मसात करने में पाठकों की सहायता करने का है। "प्रसाद" शब्द इन उपनिषदों के ज्ञान को दिव्य आशीर्वाद स्वरूप प्रस्तुत करने का संकेत देता है। यह ज्ञान आत्मज्ञान, मोक्ष और जीवन के गहरे रहस्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक है।रमेश चौहान スピリチュアリティ
エピソード
  • कठोपनिषद् तृतीय वल्ली : आत्मज्ञान का विज्ञान
    2026/07/14

    एकादशोपनिषद् प्रसाद की इस विशेष कड़ी में प्रस्तुत है काठकोपनिषद् प्रसाद के अध्याय 16 – तृतीय वल्ली : "आत्मा और ब्रह्म का मार्गदर्शन" का सरल, व्याख्यात्मक और जीवनोपयोगी विवेचन।

    इस एपिसोड में यमराज और नचिकेता के संवाद के माध्यम से कठोपनिषद् के प्रसिद्ध रथ रूपक का गहन विश्लेषण किया गया है। इसमें शरीर को रथ, आत्मा को रथी, बुद्धि को सारथी, मन को लगाम और इंद्रियों को घोड़ों के रूप में प्रस्तुत करते हुए यह बताया गया है कि आत्मसंयम और विवेकपूर्ण जीवन ही आत्मज्ञान का आधार है।

    इस चर्चा में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मन और इंद्रियों पर नियंत्रण रखने वाला साधक ही जन्म-मृत्यु के बंधनों से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त करता है। साथ ही, "उत्तिष्ठत। जाग्रत। प्राप्य वरान्निबोधत।" जैसे अमर उपनिषद् वचनों के माध्यम से साधक को जागरूक होकर सद्गुरु से ज्ञान प्राप्त करने की प्रेरणा दी गई है। आध्यात्मिक मार्ग को "क्षुरस्य धारा" अर्थात् तलवार की धार के समान सूक्ष्म और कठिन बताते हुए यह समझाया गया है कि निरंतर साधना, विवेक और आत्मानुशासन ही ब्रह्मप्राप्ति का वास्तविक मार्ग हैं।

    यदि आप कठोपनिषद् के रथ रूपक, आत्मसंयम, इंद्रिय-निग्रह, ब्रह्मज्ञान और मोक्ष के गहन रहस्यों को सरल भाषा में समझना चाहते हैं, तो यह एपिसोड आपके लिए अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक सिद्ध होगा।

    हरिः ॐ।

    続きを読む 一部表示
    23 分
  • कठोपनिषद् द्वितीय वल्ली : मोक्ष का मार्ग
    2026/06/30

    एकादशोपनिषद् प्रसाद की इस विशेष कड़ी में प्रस्तुत है काठकोपनिषद् के प्रथम अध्याय की द्वितीय वल्ली का विस्तृत एवं दार्शनिक विवेचन।

    इस एपिसोड में यमराज और नचिकेता के बीच हुए दिव्य संवाद के माध्यम से मानव जीवन के दो प्रमुख मार्गों—श्रेय (आध्यात्मिक कल्याण) और प्रेय (क्षणिक सांसारिक सुख)—का गहन विश्लेषण किया गया है। यमराज स्पष्ट करते हैं कि विवेकी मनुष्य प्रेय के आकर्षणों का त्याग कर श्रेय का चयन करता है, क्योंकि वही उसे आत्मज्ञान और मोक्ष की ओर ले जाता है।

    इस चर्चा में आत्मा की अमरता, ब्रह्म के शाश्वत स्वरूप तथा प्रणव 'ॐ' की आध्यात्मिक महिमा का विस्तृत विवेचन किया गया है। साथ ही यह भी समझाया गया है कि आत्मज्ञान केवल बौद्धिक तर्क या शास्त्रीय ज्ञान से प्राप्त नहीं होता, बल्कि इंद्रिय संयम, शुद्ध आचरण, ध्यान, साधना और सद्गुरु के मार्गदर्शन से ही उसका साक्षात्कार संभव है।

    यदि आप कठोपनिषद् के मूल संदेश, श्रेय और प्रेय के विवेक, आत्मा की अनंत सत्ता तथा ब्रह्मविद्या के रहस्यों को सरल और व्याख्यात्मक शैली में समझना चाहते हैं, तो यह एपिसोड आपके लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक सिद्ध होगा।

    हरिः ॐ।

    続きを読む 一部表示
    25 分
  • काठकोपनिषद् की प्रथम वल्ली : जिज्ञासा से ज्ञान तक
    2026/06/25

    एकादशोपनिषद् प्रसाद की इस विशेष कड़ी में प्रस्तुत है काठकोपनिषद् प्रसाद के प्रथम अध्याय की प्रथम वल्ली का विस्तृत विवेचन।

    इस एपिसोड में हम भारतीय अध्यात्म की सबसे प्रेरणादायक कथाओं में से एक, नचिकेता और यमराज के संवाद को समझेंगे। कथा का आरंभ वाजश्रवस के यज्ञ और उनके दोषपूर्ण दान से होता है, जहाँ सत्यनिष्ठ बालक नचिकेता धर्म और कर्तव्य के प्रति अपनी अद्भुत सजगता का परिचय देता है। सत्य की खोज उसे यमलोक तक ले जाती है, जहाँ मृत्यु के देवता यमराज उसकी परीक्षा लेकर उसे तीन वरदान प्रदान करते हैं।

    चर्चा का केंद्र नचिकेता का तीसरा वरदान है, जिसमें वह मृत्यु के बाद आत्मा के अस्तित्व का रहस्य जानना चाहता है। यमराज उसे धन, वैभव, दीर्घायु और स्वर्गीय सुखों का प्रलोभन देते हैं, किंतु नचिकेता अटल रहकर केवल आत्मज्ञान की कामना करता है। इसी दृढ़ जिज्ञासा के कारण वह ब्रह्मविद्या का अधिकारी बनता है।

    इस एपिसोड में आत्मा की अमरता, जीवन और मृत्यु के रहस्य, वैराग्य की आवश्यकता तथा श्रेय और प्रेय के बीच चयन जैसे गहन आध्यात्मिक विषयों पर भी प्रकाश डाला गया है। यह चर्चा हमें सिखाती है कि सत्य की खोज, विवेकपूर्ण निर्णय और ज्ञान के प्रति समर्पण ही आत्मिक उन्नति का वास्तविक मार्ग है।

    हरिः ॐ।

    続きを読む 一部表示
    22 分
adbl_web_anon_alc_button_suppression_t1
まだレビューはありません