『Gurudev Ojaswi Sharma Ji』のカバーアート

Gurudev Ojaswi Sharma Ji

Gurudev Ojaswi Sharma Ji

著者: Seeker_Who Am I
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This Podcast is a tribute to our most respected Gurudev Shri Ojaswi Sharma ji and his teaching. All material on this podcast has been adapted by seekers from original recordings of Satsangs and letters of Gurudev Shri Ojaswi Sharma. Gurudev himself has never been interested in publishing any of his talks or in publicity of any kind. However, his seekers feel the need to preserve his wisdom for themselves and others. Many questions that arise concerning the spiritual path are common to all seekers. For this reason Gurudev's talks on these topics may be an inspiration to many people.Seeker_Who Am I スピリチュアリティ
エピソード
  • ।। कमियों को दूर करने का उपाय ।।
    2026/08/08

    * आलस्य लोभ ईर्ष्या क्रोध आदि कमियां आसानी से नहीं जाती हैं


    * सूक्ष्म शरीर में इनका बड़ा गहरा स्थान होता है


    * बार-बार इनसे परास्त होने पर भी प्रयत्न करना नहीं छोड़ना है


    * प्रयत्न अपना पूरा करते हुए हमेशा भरोसा भगवान पर


    * ' योगी कथामृत ' किताब का एक किस्सा


    * सबसे पहले कमी को कमी रूप में देखो, सत्य के बिना कल्याण नहीं है जीवन में, सत्य ही भगवान है


    * आलोचना करने वाले से बड़ा लाभ है उससे हमें अपनी कमियां पता चलती है


    * कमी जब दिख जाए तो उसको अंदर देख करके उस पर ध्यान करो


    * भागवत ध्यान की अग्नि सब जला देगी


    * Face your faults head on


    * दूसरे की साधना की नकल नहीं करनी


    * संसार है भगवान को प्राप्त करने की ट्रेनिंग


    * शरीरी के साथ जबरदस्ती कभी नहीं करनी, मन के साथ करनी है

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    21 分
  • ।। पहले तय करो - चाहते क्या हो ।।
    2026/08/01

    * संसार की सारी घटनाएं प्रारब्ध से होंगी, उनमें मत उलझो


    * अपनी समस्या को समझकर फिर प्रश्न पूछें


    * मन अपने को धोखा देता है


    * भगवान का कोई भी नाम सब से अधिक जीवन को पवित्र करता है


    * रोज गीत पढ़ो, पूरी लगन से, गीता में सब बातों का उत्तर है। १३ अध्याय का अध्ययन करो


    * जप से एक protective shield बन जाता है


    * गीता - भाव से समझ में आती है


    * गीता जीवन जीना सिखाती है


    * गीता के अंदर विशेष बात - जितना भाव वृद्धि होगी, उतना ही नए नए अर्थ समझ आने लगते है


    * गीता हृदय चाहती है

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    29 分
  • GURUPURNIMA 2011
    2026/07/29
    21 分
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