エピソード

  • ।। सरल मार्ग ।।
    2026/05/07

    * भगवान को पाने के अनगिनत साधन है


    * उनमें से एक बड़ा सरल साधन है भगवान को मानो और उनकी दी हुई भागवत गीता के अनुसार चलो


    * भगवान तुम्हारी प्लानिंग में फिट नहीं होंगे, तुम उनकी पहले से बनाई हुई प्लानिंग में फिट हो जाओ


    * भिन्नता की भ्रांति है


    * खास बात यह है, हम तो भगवान को भूल जाते हैं वे हमें कभी नहीं भूलते

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    26 分
  • ।। चुप हो जाओ ।।
    2026/05/07

    अपने अंदर की शांति का एक बार भी थोड़ा अनुभव हो गया तो बहुत बड़ा काम बन जाएगा

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    25 分
  • ।। भोजन से भजन तक ।।
    2026/05/05

    * राजसिक से सात्विक भोजन की तरफ


    * Naturopathy आयुर्वेद में


    * Food is individual भोजन व्यक्तिगत होता है


    * स्वाद आना और स्वाद लेना इन दोनों में अंतर है


    * स्वाद के लिए नहीं स्वास्थ्य के लिए भोजन करो

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    24 分
  • ।। कमीयों के कारण भगवत प्राप्ति की उम्मीद नहीं छोड़नी ।।
    2026/05/01

    * कमियों से यह नहीं सोचना कि भगवत प्राप्ति कैसे होगी


    * भगवान तो केवल प्रेम देखते है


    * यह मानना गलत है कि भगवत प्राप्ति कठिन है


    * जब तक इंद्रियों के माध्यम से बाहर का सुख लेते रहोगे तब तक अंदर ही छुपा हुआ आनंद का अनुभव नहीं होता - यह नियम है


    * भागवत प्रेम का थोड़ा सा भी छीटा पड़ जाए तो यह इंद्रियां और मन अपने आप वश में आने लगते हैं


    * बहुत समय तक अपनी चतुराई का अभिमान, अपनी बुद्धि का अहंकार बना रहता है


    * हमारी संस्कृति की मुख्य आधार महिलाएं हैं, आदमी तो बिना वजह अकड़ में घूम रहा है


    * भगवान का कोई भी जप चुपचाप करते रहो


    * जीवन में सभी अच्छी बातों के प्रदर्शन से बचना चाहिए, किसको बताना चाह रहे हो जानने वाला तो सब जानता है


    * जो कह दोगे वह कम होने लग जाएगा अच्छाइयां अपनी रहते रहोगे वह काम हो जाएंगे अपनी बुराइयां व्यक्त करते रहोगे तो वह काम हो जाएंगे

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    29 分
  • ।। कमियां दूर क्यों नहीं होती ।।
    2026/04/30

    * अंदर कमी मिटानी की जलन पैदा नहीं होती


    * अपनी शक्ति तो पूरी लगनी है पर आश्रय भगवान का


    * बिना भगवान के आश्रय के अहंकार हो जाएगा


    * जो कमी है उसके विपरीत गुण लाने की चेष्टा करो, लोभ की जगह दान, क्रोध की जगह क्षमा, वासना की जगह प्रेम, निर्दयता के स्थान करुणा


    * जिसकी आयु 25 साल है वह भी कभी भी मर सकता है, इस लिये इस भ्रम में मत रहना कि समय बहुत है, तड़प लाओ और उनको पुकारो


    * मनुष्य शरीर मिलने का एक मात्र प्रयोजन भगवत्प्राप्ति है, बाकी सब बेकार है


    * काम सारे करने हैं, अंदर की नीयत बदलनी है


    * मन खुद को ठगने में बड़ा प्रवीण है


    * पश्चाताप की अग्नि से अन्तःकरण शुद्ध होता है


    * अच्छा काम करने की कोशिश मत करो, गलत काम करना छोड़ दो


    * रात दिन लगे रहो लगे रहो


    * बार बार कहता रहो हे नाथ आपको भूलू नहीं


    * हमारा वास्तविक स्वरूप न अच्छा है न बुरा है


    * वर्ण का रहस्य

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    22 分
  • सांसारिक ज्ञान को सीखने का कोई अंत?
    2026/04/30

    * मुख्य चीज अपने अंदर की शांति और आनंद


    * अपनी स्थिति को देखते हुए और अपने अंदर की शांति व आनंद को बनाए रखते हुए जितना सीख सकते हो सीख लो । सीखने का परंतु कभी कोई अंत नहीं आने वाला


    * सहज भाव से जितना सीखा जाए सीख लो और फिर शांत रहो


    * मानव जीवन मिलने के पश्चात दुखी होना महा मूर्खता की बात है


    * अनुकूल परिस्थिति में हर्षित होना और प्रतिकूल परिस्थिति में दुखी होना यह दोनों आज्ञा के कारण है


    * कर्तव्य कर्म करो उसमें रस मत लो


    * आसक्ति Attachment आत्मज्ञान में सबसे बड़ी बाधा


    * चैन से शांत बैठना नहीं आता अब

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    39 分
  • Great Minds Of India
    2026/04/30

    Great Minds Of India

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    10 分
  • || भगवान प्राप्त है - ये मान लो ||
    2026/04/30

    || भगवान प्राप्त है - ये मान लो ||

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    6 分