エピソード

  • कन्या पूजन
    2026/10/18

    Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!

    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 98

    कल सुबह, लाखों घरों में, दरवाज़े पर एक दस्तक होगी, और बाहर एक छोटी सी बच्ची खड़ी होगी। शायद छह साल की। शायद नौ की। शायद पड़ोस की, या भतीजी, या किसी सहेली की बेटी। अपने सबसे अच्छे कपड़ों में, थोड़ी शरमाई, थोड़ी उत्साहित। और जब वह भीतर आएगी, घर के बड़े उसके सामने घुटनों पर बैठेंगे, और उसके पैर धोएँगे। अगले एक घंटे, उस घर में, वह माँ है। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। अट्ठानवेवाँ एपिसोड, आठवें दिन की अंतिम कथा। आज हम माँ महागौरी से मिले, उज्ज्वल आठवाँ रूप, और संधि पूजा सुनी, बंगाल के वर्ष के सबसे पवित्र अड़तालीस मिनट। आज रात, एक अनुष्ठान, जो भारत के बड़े भाग में, किसी न किसी रूप में, अष्टमी या नवमी को होता है। कन्या पूजन, कुमारी पूजा। कन्या की पूजा।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 94।

    स्रोत। श्रेणी: परंपरा। कन्या पूजन, या कुमारी पूजा, भारत के बड़े भाग में अष्टमी या नवमी को निभाई जाने वाली जीवित परंपरा है, और घर और प्रदेश के अनुसार भिन्न है। पैर धोना, कलावा और तिलक, आरती, पूरी, चने और हलवे का भोजन, उपहार, और भैरव या लांगुर के रूप में एक बालक, व्यापक रूप से वर्णित प्रथाएँ हैं। आयु के अनुसार कन्याओं के नाम, कुमारी से सुभद्रा तक, देवी भागवत पुराण के तीसरे स्कंध से हैं, जैसे वेट्टम मणि के पुराणिक एनसाइक्लोपीडिया में विज़डमलिब डॉट ओआरजी पर दिए हैं। उन्नीस सौ एक में बेलूर मठ की कुमारी पूजा रामकृष्ण मिशन के इतिहास से है, संक्षेप में। विचार मेरा मनन है।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    続きを読む 一部表示
    8 分
  • महागौरी
    2026/10/18

    Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!

    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 97

    श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥ श्वेत वृषभ पर आरूढ़, श्वेत वस्त्र धारण किए, पवित्र, महादेव को आनंद देने वाली माँ महागौरी शुभ करें। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। सत्तानवेवाँ एपिसोड, आठवाँ दिन। बानवेवें एपिसोड में हम माँ कालरात्रि से मिले, नौ रूपों में सबसे श्याम, जिन्हें शुभंकरी भी कहते हैं। आज नवदुर्गा का आठवाँ रूप। माँ महागौरी।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 92।

    स्रोत। श्रेणी: परंपरा, एक श्लोक सहित। नवदुर्गा में आठवें रूप के रूप में महागौरी का नाम देवी कवच की सूची से है, जो उनहत्तरवें एपिसोड में आई। ध्यान श्लोक, श्वेते वृषे समारूढा, उनका रूप, और पार्वती के स्नान और श्याम कोश के कौशिकी बनने की कथा, ब्रहत डॉट इन पर पढ़े गए, जहाँ मानसरोवर का नाम है; दूसरी कथाएँ गंगा का नाम लेती हैं, या अलग ढंग से कहती हैं। कौशिकी और कालिका पर सप्तशती का अपना वर्णन पाँचवें अध्याय में है, जैसा पचहत्तरवें एपिसोड में। योग-केंद्र और नारियल का भोग बाद की और जीवित परंपरा है, और भिन्न है। सातवीं और आठवीं रात के क्रम पर विचार मेरा मनन है। श्लोक की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    続きを読む 一部表示
    9 分
  • संधि पूजा: अड़तालीस मिनट
    2026/10/18

    Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!

    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 96

    कोलकाता का एक पंडाल। लोगों से खचाखच भरा। और अचानक पूरी भीड़ चुप हो जाती है। पुरोहित घड़ी देख रहे हैं। माँ के सामने, पंक्तियों में, मिट्टी के एक सौ आठ दीपक रखे हैं, जलने को तैयार। पास में एक सौ आठ कमल, गिने हुए, फिर से गिने हुए। ढाकी अपनी डंडियाँ ढाक के ऊपर उठाए रुके हैं। क्योंकि बस एक क्षण में एक तिथि समाप्त होगी, और दूसरी शुरू। और उस क्षण के दोनों ओर फैले अड़तालीस मिनट, बंगाल के बहुत से परिवारों के लिए, पूरे वर्ष के सबसे पवित्र मिनट हैं।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 93।

    स्रोत। श्रेणी: परंपरा। संधि पूजा बंगाल की जीवित परंपरा है, और उसके अनुष्ठान घर और पंडाल के अनुसार भिन्न हैं। अष्टमी के अंतिम चौबीस और नवमी के पहले चौबीस मिनट, दो घड़ी, वाली परिभाषा, और यह मान्यता कि इसी समय चामुंडा ने चंड-मुंड को मारा, द्रिकपंचांग डॉट कॉम के अनुसार हैं। दो हज़ार छब्बीस का समय, सोमवार उन्नीस अक्टूबर, सुबह लगभग दस सत्ताईस से ग्यारह पंद्रह, द्रिकपंचांग का नई दिल्ली के लिए है; कोलकातादुर्गोत्सव डॉट कॉम पर छपी एक बंगाली पंजिका की सूची इससे पहले का समय देती है; श्रोता अपने पंचांग को मानें। एक सौ आठ दीप और कमल, ढाक, और पशु-बलि की जगह कुम्हड़ा, गन्ना या केला, व्यापक रूप से वर्णित प्रथाएँ हैं। विचार मेरा मनन है।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    続きを読む 一部表示
    9 分
  • निशुंभ का पतन, अकेला शुंभ
    2026/10/18

    Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!

    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 95

    एकैवाहं जगत्यत्र द्वितीया का ममापरा। पश्यैता दुष्ट मय्येव विशन्त्यो मद्विभूतयः॥ इस जगत में मैं अकेली हूँ। मेरे सिवा दूसरी कौन है? देख, दुष्ट, ये मेरी ही विभूतियाँ, मुझमें ही प्रवेश कर रही हैं। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। पचानवेवाँ एपिसोड, आठवाँ दिन। आज नवरात्रि का आठवाँ दिन है, माँ महागौरी का। अष्टमी तिथि आज सुबह लगती है, और इस वर्ष अधिकतर पंचांग दुर्गा अष्टमी कल, सोमवार को, नवमी के साथ मना रहे हैं। बहुत लोगों के लिए इन नौ दिनों का सबसे पवित्र दिन। इक्यानवेवें एपिसोड में रक्तबीज गिरा, काली के खुले मुख ने उसका रक्त सोख लिया, और मातृकाएँ रणभूमि में नाचीं। आज सप्तशती का नौवाँ और दसवाँ अध्याय। युद्ध का अंत। निशुंभ गिरता है। और शुंभ, जिसने यह सब इस निश्चय से शुरू किया था कि माँ भी एक और रत्न हैं, अकेला उनके सामने खड़ा होता है।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 91।

    स्रोत। श्रेणी: पुराण, श्लोकों सहित। कथा सप्तशती के नौवें और दसवें अध्याय से है, देवीमाहात्म्यम डॉट औरोभारती डॉट इन पर पाठ और अनुवाद से: राजा का प्रश्न; दोनों भाइयों का आक्रमण; निशुंभ से युद्ध और उसके शस्त्र; शुंभ की आठ भुजाएँ; शंख, धनुष, घंटा, काली और शिवदूती; शुंभ का मूर्छित होना; निशुंभ की दस हज़ार भुजाएँ; हृदय से निकला असुर; मातृकाओं द्वारा सेना का नाश; शुंभ का ताना; माँ का उत्तर और देवियों का उनमें समाना; आकाश का युद्ध और शुंभ-वध; और जगत की व्यवस्था लौटना। उद्धृत श्लोक वहाँ नौवें अध्याय का पैंतीसवाँ और दसवें अध्याय का पाँचवाँ हैं। संवाद संक्षेप में और भाव में। इस वर्ष की तिथियाँ पंचांगों के अनुसार भिन्न हैं। अष्टमी पर विचार मेरा मनन है। श्लोकों की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    続きを読む 一部表示
    13 分
  • माँ उग्र क्यों है?
    2026/10/17

    Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!

    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 94

    चित्ते कृपा समरनिष्ठुरता च दृष्टा त्वय्येव देवि वरदे भुवनत्रयेऽपि॥ हृदय में करुणा, और युद्ध में कठोरता, हे वर देने वाली देवी, तीनों लोकों में ये दोनों एक साथ केवल तुम्हीं में देखी गईं। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। चौरानवेवाँ एपिसोड, सातवें दिन की अंतिम कथा। आज हमने काली को रक्तबीज का रक्त पीते सुना, नौ रूपों में सबसे श्याम कालरात्रि से मिले, और बंगाल में केले की बहू की कथा सुनी। आज रात कुछ देर कथा कहना रोकना चाहता हूँ, और एक प्रश्न का उत्तर देने की कोशिश करना चाहता हूँ।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 92।

    स्रोत। श्रेणी: कथा-रूप और मनन, एक श्लोक सहित। देवी शस्त्र क्यों उठाती हैं, देवताओं का यह प्रश्न, और उनके उत्तर, कि शस्त्रों से पवित्र होकर शत्रु उत्तम लोकों को जाते हैं, कि युद्ध में मरकर वे लंबे नरक से बचते हैं, और कि माँ का स्वभाव दुष्टों का शमन है, पर शत्रुओं पर भी दया, सप्तशती के चौथे अध्याय के अठारहवें, उन्नीसवें और इक्कीसवें श्लोकों से हैं, देवीमाहात्म्यम डॉट औरोभारती डॉट इन पर अनुवाद सहित पढ़े गए। उद्धृत पंक्ति, चित्ते कृपा समरनिष्ठुरता च, वहाँ बाईसवें श्लोक का उत्तरार्ध है। काली की प्रतिमा का वर्णन बंगाल के प्रचलित रूप का है। बाकी उत्तर प्रचलित उपदेश और मेरा मनन हैं; सुझाव हैं, आदेश नहीं। श्लोक की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    続きを読む 一部表示
    9 分
  • नवपत्रिका: कोला बौ
    2026/10/17

    Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!

    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 93

    सप्तमी की सुबह, भोर से पहले, पूरे बंगाल में लोग केले का एक पौधा लिए नदी की ओर जाते हैं। कटा हुआ पत्ता नहीं। पूरा एक नया पौधा, और उसके साथ बँधे आठ और पौधे। पुरोहित मंत्र पढ़ते हैं। ढाक बजते हैं। और जल के किनारे, आधे अँधेरे में, उस पौधे को नहलाया जाता है, उतने ही प्यार से, जितने से किसी व्यक्ति को नहलाया जाता है। फिर लाल किनारे वाली नई सफ़ेद साड़ी पहनाई जाती है। पत्तों पर सिंदूर लगाया जाता है। और घूँघट में, दुल्हन की तरह, वापस लाकर पंडाल में गणेश जी की प्रतिमा के पास खड़ा कर दिया जाता है।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 90।

    स्रोत। श्रेणी: परंपरा। नवपत्रिका और सप्तमी का कोला बउ स्नान बंगाल की जीवित परंपरा है, और घर और प्रदेश के अनुसार भिन्न है। नौ पौधों और उनकी देवियों की प्रचलित सूची, अपराजिता की बेल और पीले धागे से बाँधना, भोर का स्नान, लाल किनारे की सफ़ेद साड़ी और सिंदूर, और गणेश के पास रखना, प्रकाशित विवरणों से है, जिनमें इंडिया करंट्स और हिंदू-ब्लॉग डॉट कॉम हैं; द्रिकपंचांग डॉट कॉम पौधों की थोड़ी अलग सूची देता है। कोला बउ को गणेश की पत्नी मानने वाली लोक-धारणा, और विद्वानों का यह मत कि वे पौधे के रूप में स्वयं दुर्गा हैं, दोनों उन्हीं विवरणों में हैं। अनुष्ठान का कृषि से उद्गम विद्वानों का सुझाव है, तय बात नहीं। विचार मेरा मनन है।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    続きを読む 一部表示
    9 分
  • कालरात्रि: शुभंकरी
    2026/10/17

    Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!

    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 92

    वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥ जिनका बायाँ पैर लोहे की काँटेदार लता से सजा है, जिनकी ध्वजा ऊँची है, वे श्याम वर्ण, भयंकर कालरात्रि। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। बानवेवाँ एपिसोड, सातवाँ दिन। नवासीवें एपिसोड में हम माँ कात्यायनी से मिले, ऋषि के आश्रम में जन्मी, हाथ में चमकता चंद्रहास। आज नवदुर्गा का सातवाँ रूप। माँ कालरात्रि। और आज ही, इक्यानवेवें एपिसोड में, उनसे सबसे गहराई से जुड़ी कथा सुनी। रक्तबीज, जिसके रक्त की हर बूँद से असुर बढ़ते थे, और वह श्याम माँ, जिन्होंने रक्त गिरने से पहले ही पी लिया।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 89।

    स्रोत। श्रेणी: परंपरा, एक श्लोक सहित। नवदुर्गा में सातवें रूप के रूप में कालरात्रि का नाम देवी कवच की सूची से है, जो उनहत्तरवें एपिसोड में आई। ध्यान श्लोक, एकवेणी जपाकर्णपूरा से कालरात्रिर्भयङ्करी तक, और उनका रूप, गधा, लोहे का काँटेदार शस्त्र, खड्ग, बिजली जैसी माला, अग्नि जैसी साँस, अभय और वरद मुद्रा, और शुभंकरी नाम, ब्रहत डॉट इन पर पढ़े गए; केवल दूसरा श्लोक उद्धृत है। नाम के अर्थ प्रचलित हैं। काली और रक्तबीज की कथा से संबंध प्रचलित भक्ति-परंपरा है। सहस्रार और गुड़ का भोग बाद की और जीवित परंपरा है, और भिन्न है। विचार मेरा मनन है। श्लोक की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    続きを読む 一部表示
    10 分
  • रक्तबीज: हर बूँद एक दानव
    2026/10/17

    Got something to say to this podcast? Send a voicemail, and you might hear yourself on the next episode!

    धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 91

    मच्छस्त्रपातसम्भूतान् रक्तबिन्दून् महासुरान्। रक्तबिन्दोः प्रतीच्छ त्वं वक्त्रेणानेन वेगिना॥ मेरे शस्त्रों के प्रहार से जो रक्त की बूँदें गिरें, और उनसे जो महासुर जन्में, उन्हें तुम अपने इस मुख से, शीघ्रता से, ग्रहण कर लो। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। इक्यानवेवाँ एपिसोड, सातवाँ दिन। सत्तासीवें एपिसोड में हमने सप्तशती के आठवें अध्याय का पहला भाग सुना। देवताओं की शक्तियाँ सात मातृकाएँ बनकर, अपने-अपने देवता के वाहन पर, निकलीं। महादेव माँ का संदेश लेकर असुरों के पास गए। और फिर मैदान में उतरा रक्तबीज, जिसके रक्त की हर बूँद से उसी के आकार का एक नया असुर उठ खड़ा होता है। हम वहाँ रुके थे, जब पूरा जगत रक्तबीजों से भर रहा था, और देवता भयभीत थे। आज सातवीं रात है, माँ कालरात्रि की, नौ रूपों में सबसे श्याम। और आज सुनते हैं, रक्तबीज का अंत कैसे हुआ।

    पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 87।

    स्रोत। श्रेणी: पुराण, श्लोकों सहित। कथा सप्तशती के आठवें अध्याय के बावनवें से तिरसठवें श्लोक तक से है, देवीमाहात्म्यम डॉट औरोभारती डॉट इन पर पाठ और अनुवाद से: रक्तबीज से भरा जगत, माँ की हँसी, चामुंडा को आदेश, रक्त पीना, रक्तबीज की गदा से माँ को पीड़ा न होना, उसका गिरना, देवताओं का आनंद और मातृकाओं का नृत्य। उद्धृत श्लोक वहाँ चौवनवाँ है; उससे पहले के शब्द, चामुंडे, मुख फैला लो, तिरपनवें श्लोक के हैं, अनुवाद में दिए। संवाद संक्षेप में और भाव में। काली की जीभ को इस कथा से जोड़ना प्रचलित व्याख्या है, ग्रंथ में नहीं कहा गया। रक्तबीज का भीतरी अर्थ प्रचलित उपदेश है, मेरे मनन के साथ। श्लोक की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।

    सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

    続きを読む 一部表示
    10 分