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माँ उग्र क्यों है?

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धर्म कथा · दूसरा सीज़न: नवरात्रि · एपिसोड 94

चित्ते कृपा समरनिष्ठुरता च दृष्टा त्वय्येव देवि वरदे भुवनत्रयेऽपि॥ हृदय में करुणा, और युद्ध में कठोरता, हे वर देने वाली देवी, तीनों लोकों में ये दोनों एक साथ केवल तुम्हीं में देखी गईं। आप सुन रहे हैं धर्म कथा। दूसरा सीज़न, नवरात्रि। चौरानवेवाँ एपिसोड, सातवें दिन की अंतिम कथा। आज हमने काली को रक्तबीज का रक्त पीते सुना, नौ रूपों में सबसे श्याम कालरात्रि से मिले, और बंगाल में केले की बहू की कथा सुनी। आज रात कुछ देर कथा कहना रोकना चाहता हूँ, और एक प्रश्न का उत्तर देने की कोशिश करना चाहता हूँ।

पिछला एपिसोड सुनें: एपिसोड 92।

स्रोत। श्रेणी: कथा-रूप और मनन, एक श्लोक सहित। देवी शस्त्र क्यों उठाती हैं, देवताओं का यह प्रश्न, और उनके उत्तर, कि शस्त्रों से पवित्र होकर शत्रु उत्तम लोकों को जाते हैं, कि युद्ध में मरकर वे लंबे नरक से बचते हैं, और कि माँ का स्वभाव दुष्टों का शमन है, पर शत्रुओं पर भी दया, सप्तशती के चौथे अध्याय के अठारहवें, उन्नीसवें और इक्कीसवें श्लोकों से हैं, देवीमाहात्म्यम डॉट औरोभारती डॉट इन पर अनुवाद सहित पढ़े गए। उद्धृत पंक्ति, चित्ते कृपा समरनिष्ठुरता च, वहाँ बाईसवें श्लोक का उत्तरार्ध है। काली की प्रतिमा का वर्णन बंगाल के प्रचलित रूप का है। बाकी उत्तर प्रचलित उपदेश और मेरा मनन हैं; सुझाव हैं, आदेश नहीं। श्लोक की पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए।

सूचना: इस एपिसोड की आवाज़ AI (कृत्रिम बुद्धि) से बनी है और पटकथा लेखन में AI की सहायता ली गई है। श्लोक प्रकाशित संस्करणों से मिलाए गए हैं; सुधार के सुझाव स्वागत योग्य हैं।

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