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एपिसोड 24: भूलभुलैया का चेहरा उसी का था | प्राग, 1893

एपिसोड 24: भूलभुलैया का चेहरा उसी का था | प्राग, 1893

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概要
1893 के प्राग, चेक गणराज्य में रची गई मौलिक काल्पनिक डरावनी कहानी: भूलभुलैया लेंका को उसी की आवाज़ में बुलाती है। रात 11:47 बजे लेंका पीतल की लालटेन लेकर एक रसायनज्ञ की छोड़ी हुई भूलभुलैया में प्रवेश करती है। रास्ता याद रखने के लिए उसने फाटक पर लाल धागा बाँधा है। अँधेरे से उसकी अपनी आवाज़ उसे बुलाती है। काँटों के मेहराब के पार कालिख का एक स्तंभ फैलता है और लेंका के नज़र हटाते ही उसकी मुस्कान ओढ़ लेता है। लाल धागे को उसे बाहर ले जाना था। लेकिन उस सत्ता के छूते ही धागा उसकी कलाई पर कसने वाला फंदा बन जाता है। लेंका के पास बस एक चाकू, मंद पड़ती रोशनी और आधी रात से पहले के कुछ मिनट बचे हैं। परिवेश का संदर्भ: यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में प्राग का ऐतिहासिक केंद्र। यह स्रोत शहर की वास्तुकला का संदर्भ देता है; कहानी की काल्पनिक प्रेतबाधा या उसके लिए चुने गए साल को ऐतिहासिक तथ्य नहीं बताता। https://whc.unesco.org/en/list/616/ इस मौलिक डरावनी कहानी को हिंदी में सुनिए। मूल हॉरर आर्टवर्क के साथ YouTube पर देखें: https://youtu.be/PYrldcsa59M
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