エピソード

  • अँगना में आज फगुनवा उतर आयल | फाग / होरी लोकगीत | Vandana Pandey
    2026/09/06

    अँगना में आज फगुनवा उतर आयल” एक मौलिक भोजपुरी फाग / होरी लोकगीत है, जिसमें फागुन की मस्ती, अबीर-गुलाल, टेसू के रंग, सखी-सहेलियों की हँसी और घर-आँगन के उत्सव का रंगीन लोकभाव है। यह प्रस्तुति वंदना पाण्डेय की आवाज़ में Vandana LokSwar के अंतर्गत प्रस्तुत की गई है।

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    6 分
  • आजु सजल बन्नी के अँगना | बन्ना-बन्नी विवाह गीत | Vandana Pandey
    2026/09/06

    आजु सजल बन्नी के अँगना” एक मौलिक भोजपुरी बन्ना-बन्नी विवाह गीत है, जिसमें मेहँदी, सखी-सहेलियाँ, माँ-बाबा का आशीर्वाद, विवाह की खुशी और बेटी के नए जीवन की भावनाएँ शामिल हैं। यह प्रस्तुति वंदना पाण्डेय की आवाज़ में Vandana LokSwar के अंतर्गत प्रस्तुत की गई है।

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    7 分
  • बन्ना तुम तो चले कॉलेज रे | बन्ना-बन्नी विवाह गीत | Vandana Pandey
    2026/09/06

    बन्ना तुम तो चले कॉलेज रे” एक चुलबुला पारंपरिक बन्ना-बन्नी विवाह गीत है, जिसमें दूल्हा-दुल्हन के बीच हँसी-मजाक, छेड़छाड़ और पारिवारिक अपनापन झलकता है। यह प्रस्तुति वंदना पाण्डेय की आवाज़ में Vandana LokSwar के अंतर्गत प्रस्तुत की गई है।

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    5 分
  • घिरि आई बदरिया सावन की | कजरी लोकगीत | Vandana Pandey
    2026/09/06

    घिरि आई बदरिया सावन की” एक मौलिक भोजपुरी कजरी लोकगीत है, जिसमें सावन ऋतु, मेघ, विरह, प्रेम और पिया की प्रतीक्षा का भाव व्यक्त होता है। यह गीत उत्तर भारत की कजरी परंपरा की आत्मा से प्रेरित है और वंदना पाण्डेय की आवाज़ में Vandana LokSwar के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया है।

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    7 分
  • काली कोयलिया | पारंपरिक सोहर | Vandana Pandey
    2026/09/06

    काली कोयलिया” उत्तर भारत की पारंपरिक सोहर परंपरा से जुड़ा मंगलगीत है। नवजात शिशु के जन्म की खुशी, परिवार के आशीर्वाद और घर-आँगन के उत्सव को यह गीत बहुत सहज लोकभाव में प्रस्तुत करता है। यह प्रस्तुति वंदना पाण्डेय की आवाज़ में Vandana LokSwar के अंतर्गत प्रस्तुत की गई है।

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    3 分
  • जुग जुग जियसु ललनवा | पारंपरिक सोहर | Vandana Pandey
    2026/09/06

    जुग जुग जियसु ललनवा” उत्तर भारत की पारंपरिक सोहर परंपरा से जुड़ा एक मंगलगीत है, जिसे नवजात शिशु के जन्म की खुशी, आशीर्वाद और पारिवारिक उल्लास के अवसर पर गाया जाता है। यह प्रस्तुति वंदना पाण्डेय की आवाज़ में Vandana LokSwar के लिए प्रस्तुत की गई है।

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    3 分
  • माटी की अनकही कहानियाँ | वंदना लोकस्वर की शुरुआत | Episode 1
    2026/09/06

    वंदना लोकस्वर के पहले एपिसोड “माटी की अनकही कहानियाँ” में वंदना पाण्डेय उत्तर भारत की लोकगीत परंपराओं की दुनिया से आपका परिचय कराती हैं। सोहर, कजरी, चैती, बारहमासा, जंतसार, बन्ना-बन्नी, फाग, झूला, रसिया और अन्य लोकधाराएँ केवल गीत नहीं, बल्कि हमारे घर-आँगन, रिश्तों, संस्कारों और पीढ़ियों की स्मृतियाँ हैं। इस एपिसोड से शुरू होती है लोकगीतों की कहानी, उनके भाव, सांस्कृतिक संदर्भ और हमारी मिट्टी की आवाज़ को समझने और सहेजने की यात्रा।

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    3 分