『Padhaku Nitin』のカバーアート

Padhaku Nitin

Padhaku Nitin

著者: Aaj Tak Radio
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概要

Padhaku Nitin is a casual and long conversation-based podcast where Aaj Tak Radio host Nitin talks to experts and discuss a wide range of topics like history, war, politics, policy, ideologies, cinema, travelling, sports, nature and everything that is interesting. A single episode of the show can be as enriching as reading four books. As we say in the podcast,Chaar kitaabe padhne jitna gyaan milega Padhaku Nitin mein.

कब कोई हक़ीक़त से मिथक बन जाता है? क्यों कोई कहानी सदियाँ पार करके हमारे सिरहाने आ बैठती है? कुछ नाम तो इंसानों की कलेक्टिव मेमोरी का हमेशा के लिए हिस्सा बन जाते हैं लेकिन पूरी की पूरी सभ्यता चुपचाप कैसे मिट जाती है?

भाषा के ग्रामर से मिले कब, क्यों, कैसे, कहां, किसने ऐसे शब्द हैं जो सेंटेंस में जुड़ जाएँ तो सवाल पैदा करते हैं और सवालों के बारे में आइंस्टीन ने कहा था- The important thing is not to stop questioning. पढ़ाकू नितिन ऐसा ही पॉडकास्ट है जिसमें किसी टॉपिक का रेशा रेशा खुलने तक हम सवाल पूछने से थकते नहीं.Copyright © 2026 Living Media India Limited
世界
エピソード
  • हिमंता बिस्व सरमा की परेशानी, कांग्रेस की चार्जशीट और असम की मियां प्रॉब्लम: पढ़ाकू नितिन
    2026/02/26
    हमने कुछ महीने पहले ज़ुबिन गर्ग पर एक लंबी चौड़ा पॉडकास्ट किया था. उनके गानों की चर्चा हुई, उनके किस्से सुने हमने लेकिन जाते जाते हमारे गेस्ट ने एक बात कही- जब 2026 में असम चुनाव होगा तो ज़ुबिन गर्ग एक बड़ा मुद्दा साबित होगा. असम चुनाव का ऐलान हो चुका है. पार्टियों ने ज़मीन पर उतर कर जनता की सुध लेनी शुरू कर दी है. Screening Committees अब चुनावी चेहरों पर मंथन करना शुरू कर चुकी हैं. Strategies बन चुकी हैं. तो हमने सोचा कि Pre-Chunav माहौल में एक ऐसा पॉडकास्ट तो कर ही लिया जाए. जिससे कि हमारे देखने सुनने वालों को पता तो चले कि असम चुनाव इतना ख़ास है क्यों? हिंदी भाषी ऑडियंस को इस बात का अंदाज़ा तो हो कि दरअसल असम के मुद्दे क्या हैं? वहां बड़ी बड़ी पार्टियां कौनसी हैं? बड़े चेहरे कौनसे हैं?Padhaku Nitin का ये एपिसोड Assam पर ही. और मेहमान हैं Kaushik Deka, India Today North East के एडिटर हैं. India Today Magazine के Managing Editor हैं. इस बात को कहने में कोई दो राए नहीं है कि असम पर इनसे ज़्यादा बेहतर एक्सपर्ट आपको नहीं मिल सकता, क्योंकि Experience और Insight दोनों तगड़े हैं इनके. एपिसोड पूरा सुनिएगा.

    प्रड्यूसर: मानव देव रावत
    साउंड मिक्स: रोहन भारती
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    1 時間 27 分
  • आपकी ज़िंदगी से 8 साल खा रहे प्रदूषण को कौन रोक नहीं रहा? : पढ़ाकू नितिन
    2026/02/19
    देश के कोने कोने से आवाज़ें आ रहीं हैं. AQI डबल से ट्रिपल डिजिट हुआ जा रहा है इसका ख़्याल कीजिए. हवा में जो ज़हर घुलता जा रहा है इसका ख़्याल कीजिए. क्योंकि WHO के आंकड़े ऐसा बताते हैं कि दुनिया की 99% जनता, Air Pollution के सीधे ख़तरों से प्रभावित है. न उनका दिल सुरक्षित है, न दिमाग और न फेंफड़े. अब जब बात इतनी गंभीर है, तो इस पर बात होना भी Urgent हो जाता है. तो याद रखिए, Padhaku Nitin का ये एपिसोड सिर्फ़ इंट्रेस्टिंग ही नहीं बेहद Urgent भी है. आज बात करेंगे की Air Pollution की समस्या को Solve करने में हम कहां पीछे रह रहे हैं? क्या Policy Making की कमी है? या क्या हम इस प्रॉबल्म को Misjudge कर रहे हैं? क्या Pollution के चलते सिर्फ़ हमारी Society ही नहीं, Economy भी धीमे धीमे नुकसान उठा रही है? फोकस दिल्ली पर भी करेंगे. पूछेंगे कि क्या AQI को टेंप्रेचर का स्केल बता देना या पानी छिड़क देना Monitoring Scales के आसपास. किसी भी तरह से Pollution को मिटाने के लिए कोई वैज्ञानिक तरीका है? यही पूछा है इस एपिसोड में जाने माने Environmentalist Chandra Bhushan जी से. पिछले दो दशकों से ये लगातार Environment से जुड़े मुद्दों पर गहरी रिसर्च करते हैं, करवाते हैं. Panels का हिस्सा होते हैं और उस चर्चा से और भी आगे बढ़कर चीज़ें समझाते हैं जहां Air Pollution की चर्चा दिल्ली की गाड़ियों से शुरू होती है. iForest (International Forum for Environment, Sustainability और Technology) नाम की प्रतिष्ठित संस्था के CEO भी हैं. एपिसोड पूरा सुनिएगा.

    प्रड्यूसर: मानव देव रावत
    साउंड मिक्स: अमन पाल
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    1 時間 8 分
  • Dhurandhar, Kashmir Files और Kerala Story जैसी फिल्में नहीं बननी चाहिए? : पढ़ाकू नितिन
    2026/02/12
    सिनेमा सिर्फ़ मनोरंजन ही नहीं, किसी समाज को, उसकी जड़ों और उसके culture को समझने का एक रास्ता भी है. सिनेमा के अंदर वह ताकत है कि आप 2026 में किसी थिएटर में बैठकर The Godfather देखें, तो मुमकिन है आपको लगे कि World War II अभी-अभी खत्म हुआ है. उसी थिएटर में बैठकर Interstellar देखें, तो महसूस हो कि दुनिया खत्म होने के कगार पर है. और अगर ओए लक्की! लक्की ओए! देखें, तो समझ आए कि दिल्लीवालों की complexities क्या हैं. Cinema एक subjective माध्यम भी है. दो अलग-अलग लोग एक ही फिल्म को अलग नजरिए से देख सकते हैं और इस पर बहस कर सकते हैं कि क्या वह फिल्म किसी propaganda का हिस्सा है या सच्चाई दिखाती है. आपने धुरंधर, छावा और The Kashmir Files को लेकर हुए बवाल भी देखे होंगे. क्योंकि आजकल फिल्मों पर propaganda cinema होने के आरोप पहले से ज़्यादा लगने लगे हैं.

    Padhaku Nitin के इस एपिसोड में फिल्म journalist Mihir Pandya और documentary filmmaker Eshan Sharma के साथ इसी मुद्दे को टटोलेंगे. ये सिनेमा को पढ़ते भी हैं और पढ़ाते भी हैं, एक अलग नजरिए के साथ. इन्होंने हाल ही में propaganda cinema पर एक workshop भी की है. इसलिए आज हम इन्हीं से समझेंगे कि propaganda cinema आखिर होता क्या है. क्या propaganda-less cinema जैसी कोई चीज होती भी है. क्या सिनेमा सिर्फ एक छलावा है. क्या cinema की अपनी politics होती है, और क्या politics के बिना cinema संभव है.
    अंत तक बने रहिएगा. चैनल Subscribe करना भी न भूलिएगा.

    प्रड्यूसर: मानव देव रावत
    साउंड मिक्स: अमन पाल
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    1 時間 39 分
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