『Gurudev Ojaswi Sharma Ji』のカバーアート

Gurudev Ojaswi Sharma Ji

Gurudev Ojaswi Sharma Ji

著者: Seeker_Who Am I
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概要

This Podcast is a tribute to our most respected Gurudev Shri Ojaswi Sharma ji and his teaching. All material on this podcast has been adapted by seekers from original recordings of Satsangs and letters of Gurudev Shri Ojaswi Sharma. Gurudev himself has never been interested in publishing any of his talks or in publicity of any kind. However, his seekers feel the need to preserve his wisdom for themselves and others. Many questions that arise concerning the spiritual path are common to all seekers. For this reason Gurudev's talks on these topics may be an inspiration to many people.Seeker_Who Am I スピリチュアリティ
エピソード
  • ।। भोजन से भजन तक ।।
    2026/05/05

    * राजसिक से सात्विक भोजन की तरफ


    * Naturopathy आयुर्वेद में


    * Food is individual भोजन व्यक्तिगत होता है


    * स्वाद आना और स्वाद लेना इन दोनों में अंतर है


    * स्वाद के लिए नहीं स्वास्थ्य के लिए भोजन करो

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    24 分
  • ।। कमीयों के कारण भगवत प्राप्ति की उम्मीद नहीं छोड़नी ।।
    2026/05/01

    * कमियों से यह नहीं सोचना कि भगवत प्राप्ति कैसे होगी


    * भगवान तो केवल प्रेम देखते है


    * यह मानना गलत है कि भगवत प्राप्ति कठिन है


    * जब तक इंद्रियों के माध्यम से बाहर का सुख लेते रहोगे तब तक अंदर ही छुपा हुआ आनंद का अनुभव नहीं होता - यह नियम है


    * भागवत प्रेम का थोड़ा सा भी छीटा पड़ जाए तो यह इंद्रियां और मन अपने आप वश में आने लगते हैं


    * बहुत समय तक अपनी चतुराई का अभिमान, अपनी बुद्धि का अहंकार बना रहता है


    * हमारी संस्कृति की मुख्य आधार महिलाएं हैं, आदमी तो बिना वजह अकड़ में घूम रहा है


    * भगवान का कोई भी जप चुपचाप करते रहो


    * जीवन में सभी अच्छी बातों के प्रदर्शन से बचना चाहिए, किसको बताना चाह रहे हो जानने वाला तो सब जानता है


    * जो कह दोगे वह कम होने लग जाएगा अच्छाइयां अपनी रहते रहोगे वह काम हो जाएंगे अपनी बुराइयां व्यक्त करते रहोगे तो वह काम हो जाएंगे

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    29 分
  • ।। कमियां दूर क्यों नहीं होती ।।
    2026/04/30

    * अंदर कमी मिटानी की जलन पैदा नहीं होती


    * अपनी शक्ति तो पूरी लगनी है पर आश्रय भगवान का


    * बिना भगवान के आश्रय के अहंकार हो जाएगा


    * जो कमी है उसके विपरीत गुण लाने की चेष्टा करो, लोभ की जगह दान, क्रोध की जगह क्षमा, वासना की जगह प्रेम, निर्दयता के स्थान करुणा


    * जिसकी आयु 25 साल है वह भी कभी भी मर सकता है, इस लिये इस भ्रम में मत रहना कि समय बहुत है, तड़प लाओ और उनको पुकारो


    * मनुष्य शरीर मिलने का एक मात्र प्रयोजन भगवत्प्राप्ति है, बाकी सब बेकार है


    * काम सारे करने हैं, अंदर की नीयत बदलनी है


    * मन खुद को ठगने में बड़ा प्रवीण है


    * पश्चाताप की अग्नि से अन्तःकरण शुद्ध होता है


    * अच्छा काम करने की कोशिश मत करो, गलत काम करना छोड़ दो


    * रात दिन लगे रहो लगे रहो


    * बार बार कहता रहो हे नाथ आपको भूलू नहीं


    * हमारा वास्तविक स्वरूप न अच्छा है न बुरा है


    * वर्ण का रहस्य

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    22 分
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