भक्त प्रहलाद द्वारा की गई श्री हरि स्तुति का संक्षिप्त सार:
पाप नाशक व रक्षक: श्री हरि अज्ञान का अंधकार मिटाने वाले परम प्रकाश और शरणागतों के रक्षक हैं।
दिव्य स्वरूप: प्रभु नीलमणि के समान श्याम वर्ण के हैं, जो शंख-चक्र-गदा-पद्म धारण करते हैं और भक्तों के हृदय में निवास करते हैं।
विराट शक्ति: वे बाल रूप में भी समस्त सृष्टि को अपने उदर में समेटे हुए हैं और जन्म-मृत्यु के विकारों से मुक्त हैं।
सौंदर्य व कृपा: माता लक्ष्मी के साथ सुशोभित भगवान विष्णु अपने भक्तों के मोह और दुखों को वैसे ही नष्ट करते हैं जैसे सूर्य अंधकार को।