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サマリー
あらすじ・解説
नीरज की गुल्लक में फिर से आपका स्वागत है, आशा है कि आप सब की जिंदगी एकदम झकास चल रही है | मेरी जिंदगी , मेरी जिंदगी भी कुछ इस तरह से चल रही है, मानो धीमी आंच पर चाय उबल रही है
हमने आपसे वादा किया था जल्दी ही आपके समक्ष उपस्तिथ होंगे कृष्णा सुदामा मैत्री का शेष भाग लेकर। वो कहते हैं ना कि, वो दोस्ती ही क्या जिसमे हिसाब हो, दोस्ती तो हमेशा बेहिसाब होती है।
आईये शुरू करते हैं कृष्ण सुदामा प्रेम पार्ट २, दोस्ती/मैत्री का ये अद्भुत दृश्य, आनंदित होकर सुनिए
द्वारपाल कृष्णा से कहता है.....
Welcome back to Neeraj ki Gullak, hope you all are having a great time. My life, my life is also going on in such a way, as if tea is boiling on low flame. We had promised you that Krishna Sudama Prem Part -2 shall be presented before you soon. They say that friendship is not the only one in which there is calculation, friendship is always without any calculation. Let's start Krishna Sudama Prem Part 2, this wonderful scene of friendship. Let's listen with pleasure. The gatekeeper tells Krishna...