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[Hindi] ॐकार का चमत्कार — चेतना की अवर्णनीय चौथी अवस्था।

[Hindi] ॐकार का चमत्कार — चेतना की अवर्णनीय चौथी अवस्था।

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[Preview books] [Borrow books] [Pause] पिछले एपिसोड में हमने अपने प्राचीन भारतीय दार्शनिकों द्वारा वर्णित चेतना की तीन अवस्थाओं पर चर्चा की थी। अपनी चर्चा के लिए हमने उपनिषदों में से एक, माण्डूक्य उपनिषद को आधार बनाया था।यह उपनिषद चेतना की तीन अवस्थाओं—जाग्रत अवस्था, स्वप्न अवस्था और सुषुप्ति अवस्था—के बारे में बताता है। ये वही तीन अवस्थाएँ हैं जिन्हें हम सभी जीवों में प्रतिदिन देखते हैं। इसके बाद यह 'तुरीय' नामक चौथी अवस्था का वर्णन करता है।आख़िर यह तुरीय अवस्था क्या है? जब भी किसी नई अवधारणा का परिचय कराया जाता है, तो उसकी तुलना पहले से ज्ञात बातों से करना, या उससे उसका अंतर बताना स्वाभाविक होता है। यह उपनिषद भी सबसे पहले यही करता है।उपनिषद कहता है कि तुरीय अवस्था, जाग्रत अवस्था जैसी नहीं है। जाग्रत अवस्था में हमारी चेतना बाहरी संसार के साथ व्यवहार करती है। लेकिन तुरीय अवस्था में ऐसा कोई बाहरी व्यवहार नहीं होता।उपनिषद यह भी कहता है कि यह चेतना किसी भी प्रकार के स्वप्न उत्पन्न नहीं करती। अर्थात् यह स्वप्न अवस्था से भी भिन्न है।तो क्या तुरीय ऐसी अवस्था हो सकती है जो आधी स्वप्न और आधी जाग्रत हो? उपनिषद इस संभावना को भी अस्वीकार कर देता है।ऐसी स्थिति में हमारे सामने केवल एक ही संभावना बचती है कि तुरीय, गहरी नींद की तरह चेतना की पूरी तरह सुप्त अवस्था होगी। गहरी नींद में हम ऐसा ही देखते हैं। लेकिन उपनिषद इस संभावना को भी नकार देता है।साथ ही उपनिषद यह भी कहता है कि तुरीय न तो ऐसी शून्य अवस्था है जिसमें कोई चेतना ही न हो, और न ही ऐसी अवस्था है जिसमें किसी विशेष वस्तु का ज्ञान हो।उपनिषद इन सभी बातों को संक्षेप में इस प्रकार कहता है—"न अन्तःप्रज्ञं, न बहिःप्रज्ञं, न उभयतःप्रज्ञं, न प्रज्ञानघनं, न प्रज्ञं, न अप्रज्ञं।"तो फिर वास्तव में तुरीय क्या है?यदि हमें किसी वस्तु का वर्णन 'यह ऐसा है' कहकर करना हो, तो उसका इन्द्रियों द्वारा ग्रहण किया जा सकना आवश्यक है। लेकिन उपनिषद कहता है कि तुरीय ऐसी कोई वस्तु नहीं है जिसे इन्द्रियों से ग्रहण किया जा सके।कभी-कभी किसी वस्तु का वर्णन यह बताकर किया जा सकता है कि उसका उपयोग किस काम के लिए होता है। लेकिन उपनिषद के अनुसार तुरीय ऐसी कोई वस्तु नहीं है जिसका किसी कार्य के लिए उपयोग ...
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