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Beyond Placement: The Final Semester Diaries

Beyond Placement: The Final Semester Diaries

著者: sagar gadhwal
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यह कहानी है एक फाइनल ईयर स्टूडेंट की, जो अपने कॉलेज के आख़िरी दिनों को रिकॉर्ड कर रहा है — ताकि जब वो भविष्य में पीछे मुड़कर देखे, तो उसे याद रहे कि सपने कहाँ से शुरू हुए थे।


आज से मैं अपने कॉलेज के आख़िरी कुछ दिनों को रिकॉर्ड करने जा रहा हूँ।

अभी साल 2026 चल रहा है।
मैं एक फाइनल ईयर B.Tech Petroleum Engineering का स्टूडेंट हूँ।

और आज 8 मार्च है। अगर कैलेंडर देखो तो मेरे कॉलेज लाइफ के लगभग आख़िरी 60 दिन ही बचे हुए हैं।

चार साल का यह सफर कब शुरू हुआ और कब यहाँ तक पहुँच गया, सच कहूँ तो समझ ही नहीं आया। ऐसा लगता है जैसे कल ही कॉलेज का पहला दिन था — नया कैंपस, नए दोस्त, और यह जिज्ञासा कि आने वाले चार साल मेरी जिंदगी को किस दिशा में ले जाएंगे।

लेकिन आज मैं यहाँ बैठा हूँ, अपने कॉलेज के आख़िरी सेमेस्टर में।

और मैंने सोचा कि इन आख़िरी दिनों को बस ऐसे ही गुजरने नहीं देना चाहिए।
इन्हें रिकॉर्ड करना चाहिए।
इन्हें डॉक्यूमेंट करना चाहिए।

इसलिए मैंने यह पॉडकास्ट शुरू किया है।

© 2026 Beyond Placement: The Final Semester Diaries
個人的成功 自己啓発
エピソード
  • Don't reduce size of the dream, increase the effort
    2026/03/22
    आज 9 मार्च है। मिड-सेमेस्टर के बाद की छुट्टियाँ खत्म हो चुकी हैं और आज से फिर क्लास शुरू होने वाली है। और अगर मैं अपनी ज़िंदगी के इस पल को देखूँ, तो मैं अपनी B.Tech journey केआठवेंसेमेस्टरकेबिल्कुलआख़िरीस्टेजपरखड़ाहूँ।आज सुबह जब मैं उठा, तो मेरे मन में एक अजीब सा विचार आया। कभी-कभी ऐसा होता है ना कि जब आप अपने सपनों को पूरा करने की तरफ बढ़ रहे होते हो, उस बीच के जो ड्युरेशन होता है… उसी में अचानक एक डाउट आ जाता है।मेरे मन में भी वही सवाल आया — क्यामैंजोसपनेदेखरहाहूँ, वोसचमेंपूरेहोसकतेहैं? या फिर मैं बस बड़े-बड़े सपने देख रहा हूँ और असल में कुछ कर नहीं पा रहा हूँ?मैं आपको बता दूँ कि 2026 केलिएमेरेआठबड़ेसपनेहैं। और उनमें से पाँचऐसेसपनेहैंजिन्हेंमैंअपनेकॉलेजलाइफखत्महोनेसेपहलेपूराकरनाचाहताहूँ।लेकिन आज सुबह जब मैं सोच रहा था, तो मुझे ये भी याद आया कि सपनों के साथ-साथ कुछ formalities भी हैं जिन्हें पूरा करना ज़रूरी है। मुझे दोBTPs करने हैं। मुझे academics परध्यानदेनाहै।तो मेरे मन में एक पल के लिए ये सवाल आया — क्यामैंअपनेइतनेबड़े-बड़ेसपनोंकेनीचेखुदकोमैनेजनहींकरपारहाहूँ?क्योंकि सच तो यह है कि डाउटउसीसमयआताहैजबहमबड़ेसपनेतोदेखलेतेहैं, लेकिनउनपरएक्शननहींलेपाते।फिर मैंने सोचा… इसका सॉल्यूशन क्या है?और मुझे एक बहुत सिंपल सा जवाब मिला।चाहेमेरेसपनेकितनेभीबड़ेहों, मैंअपनेसपनोंकादायराछोटानहींकरूँगा।हाँ, हो सकता है कि अभी इन पाँचों सपनों पर मैं एक साथ काम नहीं कर पा रहा हूँ। लेकिन साथ-साथ मुझे अपनी academic formalities भी पूरी करनी हैं, और मैं उन्हें भी अपनी daily life में शामिल करूँगा।मैं कोशिश करूँगा कि हर दिन थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ूँ। छोटे-छोटे स्टेप्स लूँ।क्योंकि हमारे महाकाव्य महाभारत में भी भगवान कृष्ण ने कहा है —“कर्मण्येवाधिकारस्तेमाफलेषुकदाचन।”मतलब — हमारा अधिकार सिर्फ कर्मपरहै, फल पर नहीं।हमें अपना काम करते रहना चाहिए। अगर हम वो काम कर रहे हैं जो सफलता के लिए ज़रूरी है, तो result eventually हमारेfavor मेंहीआएगा।तो आज सुबह मैं सोच रहा था — क्या मुझे अपने सपनों को छोड़ देना चाहिए? क्या मुझे उनकी intensity कम कर देनी चाहिए?और मेरा जवाब है — नहीं।सपनोंकादायराकभीछोटामतकरो।अगर कुछ करना है, तो अपनीintensity बढ़ाओ। अपने आपको मैनेज करो। अपना time manage करो ...
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