『2. पवित्र स्थान के परदे और खम्भे (निर्गमन २६:३१-३७)』のカバーアート

2. पवित्र स्थान के परदे और खम्भे (निर्गमन २६:३१-३७)

2. पवित्र स्थान के परदे और खम्भे (निर्गमन २६:३१-३७)

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मैं पवित्र स्थान के खम्भे और उसके परदों के रंगों में निहित आत्मिक मतलब पर मनन करना चाहूँगा। हम यहाँ जिस मिलापवाले तम्बू के बारे में बात कर रहे है वह १३.५ मीटर (४५ फीट) लंबा और ४.५ मीटर (१५ फीट) चौड़ा है, और यह पवित्र स्थान और परमपवित्र स्थान ऐसे दो कमरों में विभाजित किया गया है। पवित्र स्थान के अन्दर, दीवट, भेंट की रोटी की मेज, और धूप वेदी थी, जब की परमपवित्र अथां के अन्दर साक्षीपत्र का संदूक और दयासन को रखा गया था।
पवित्र स्थान और परमपवित्र स्थान के अनुसार, मिलापवाला तम्बू चारों ओर से ७० सेंटीमीटर (२.३ फीट) चौड़े और ४.५ मीटर (१५ फीट) ऊँचे बबूल की लकड़ी से बने पटिये से घिरा हुआ था। और मिलापवाले तम्बू के द्वार पर, सोने से मढ़े बबूल की लकड़ी से बने पाँच खम्भों को रखा गया था। बहार से अन्दर प्रवेश करने के लिए जो द्वार था वह खुद नीले, बैंजनी, और लाल कपड़े और बटी हुई सनी के कपड़े से बुना हुआ था।

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