।। दैनिक साधना का महत्व ।।
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* जो व्यक्ति दूसरे का जितना ध्यान जीवन में रख कर चलता है, वो उतना ही भगवान के निकट होता है
* धर्म के दस लक्षण मनु स्मृति में
* पहला लक्षण - धैर्य
* दूसरा - क्षमा
* तीसरा - दम
* चौथा - आस्ते ( चोरी न करना )
* पांचवा - शौंच
* छठा - इंद्रियों को वश में रखना
* सातवां - सात्विक बुद्धि
* आठवां - सात्विक ज्ञान
* नौवा - सत्य वचन
* दसवां - क्रोध न करना
* सच्चा साधक २४ घंटे का _ हर समय अपने ऊपर निगाह
* वही काम करते हुए नीयत बदलनी है
* सांसारिक जीवन और आध्यात्मिक जीवन में कोई भेद नहीं
* ऐसा नहीं है कि साधक को जीवन में ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है
* अनंत जन्मों का मैल निकलता है
* इस संसार में पतन होने की चेष्टा करने की आवश्यकता नहीं है। पतन तो होगा , यदि उत्थान की चेष्टा नहीं करी तो
* इस लिए रोज ध्यान रोज भजन, जो साधना है रोज करे जाओ
* तुम फंस गये, अब भाग नहीं सकते
* आत्मा क्या है? इसको समझने की कोशिश मत करो, तुम्हें समझ में आयेगा नहीं। बस मान लो
* अनंत आत्मा के महा-सागर में लहरें उठ रही है। लहर का अलग होने का भ्रम मुश्य शरीर में आकर ही खत्म होता है