श्रद्धांजलि : पंडवानी की अमर स्वर-सम्राज्ञी डॉ. तीजन बाई
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पंडवानी की अमर स्वर-सम्राज्ञी, पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई को "सुरता : साहित्य की धरोहर" की विनम्र श्रद्धांजलि।
5 जुलाई को 70 वर्ष की आयु में उनके निधन के साथ भारतीय लोककला और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपरा ने अपनी एक अमूल्य धरोहर खो दी। इस विशेष श्रद्धांजलि एपिसोड में हम उनके संघर्षपूर्ण जीवन, अद्वितीय कला-साधना, पंडवानी को विश्व मंच तक पहुँचाने में उनके ऐतिहासिक योगदान तथा भारतीय लोकसंस्कृति में उनके अविस्मरणीय स्थान का स्मरण करते हैं।
तीजन बाई ने अपनी ओजस्वी वाणी, सशक्त अभिनय और अनुपम कथावाचन शैली से महाभारत की कथाओं को जन-जन तक पहुँचाया। उन्होंने सिद्ध किया कि लोककला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक अस्मिता और जीवन-मूल्यों की जीवंत अभिव्यक्ति है।
आइए, इस विशेष प्रस्तुति के माध्यम से उस महान लोक साधिका को श्रद्धा, कृतज्ञता और अश्रुपूरित नमन अर्पित करें, जिनकी स्वर-गाथा सदैव भारतीय संस्कृति के आकाश में गूँजती रहेगी।
भावभीनी श्रद्धांजलि।
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