राजविद्या–राजगुह्ययोग (भगवद गीता अध्याय 9)
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概要
इस एपिसोड में हम भगवद गीता के नौवें अध्याय — राजविद्या और राजगुह्ययोग के दिव्य रहस्यों पर चिंतन करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को उस परम ज्ञान से अवगत कराते हैं जिसे वे स्वयं सब विद्याओं का राजा और सब रहस्यों का राजा कहते हैं। यह ज्ञान पवित्र, अविनाशी और प्रत्यक्ष अनुभव के योग्य है।
इस चर्चा में हम समझते हैं कि कैसे श्रीकृष्ण संपूर्ण सृष्टि के रचयिता, पालक और संहारक होते हुए भी कर्मों से अनासक्त रहते हैं, और कैसे उनकी योगमाया के कारण जीव जन्म-मरण के चक्र में बंधा रहता है। यह एपिसोड स्पष्ट करता है कि भौतिक आडंबरों से परे, केवल अटूट श्रद्धा, निष्काम भक्ति और पूर्ण समर्पण ही मनुष्य को संसारिक दुःखों से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाते हैं।
यह श्रवण यात्रा उन साधकों के लिए है जो गीता के गूढ़ ज्ञान को केवल समझना नहीं, बल्कि जीवन में उतारना चाहते हैं।