'मेडल' : ईमानदारी, कर्तव्य और सम्मान की प्रेरक कहानी
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क्या आज के समय में ईमानदारी का सम्मान होता है? क्या सत्य और कर्तव्यनिष्ठा अंततः अपना उचित स्थान प्राप्त करते हैं?
'सुरता: साहित्य की धरोहर' के इस विशेष एपिशोड में प्रस्तुत है सुप्रसिद्ध व्याकरणविद्, कहानीकार एवं समीक्षक डॉ. विनोद कुमार वर्मा की प्रेरक हिन्दी कहानी "मेडल" का सस्वर वाचन।
यह कहानी एक ऐसे युवा पुलिस अधिकारी हेमलाल मरकाम की है, जो बार-बार स्थानांतरण, राजनीतिक दबाव और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने कर्तव्य से समझौता नहीं करता। मुख्यमंत्री की निजी गाड़ी का भी नियमों के अनुसार चालान करने वाला यह अधिकारी अंततः अपनी ईमानदारी, निष्पक्षता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए भारतीय पुलिस पदक से सम्मानित होता है।
एपिशोड में कहानी के साथ-साथ प्रतिष्ठित साहित्यकारों एवं समीक्षकों की समीक्षाएँ और प्रतिक्रियाएँ भी सम्मिलित हैं—
- पद्मलोचन शर्मा — जिन्होंने कहानी को "सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं" के सिद्धांत का सशक्त उदाहरण बताया।
- डॉ. भावना एन. सावलिया (गांधीनगर) — जिनके अनुसार यह कहानी युवा पीढ़ी में साहस, ईमानदारी और कर्तव्यबोध का संचार करती है।
- मणिशंकर दुबे 'रामरागी' — जिन्होंने इसकी तुलना मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानी "नमक का दरोगा" से करते हुए इसे सत्ता पर कर्तव्य की विजय की कथा कहा।
- पवन जैन — जिन्होंने हिन्दी कथा में स्थानीय भाषा के प्रभावी प्रयोग की सराहना की।
यदि आपको प्रेरक साहित्य, जीवन-मूल्यों पर आधारित कहानियाँ और साहित्यिक विमर्श पसंद हैं, तो यह एपिशोड अवश्य सुनें।
सुरता: साहित्य की धरोहर — जहाँ शब्द केवल पढ़े नहीं जाते, बल्कि जीवन को दिशा भी देते हैं।