エピソード

  • ज़ख़्म की दास्ताँ
    2021/06/07

    जब हमारे ज़ख़्म एक से हों और हमारे दर्द की दास्तानें भी तो मरहम लगाने में इतनी झिझक सी क्यों उठती है ज़ेहन में ? इस कविता को सुनने के बाद खुद से ये सवाल ज़रूर कीजिएगा क्यूंकि इसका जवाब आपके अंदर ही घर करके बैठा है जिसे बस थोड़ी मोहब्बत की ज़रूरत है और शायद थोड़े मरहम की भी |

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    1 分
  • आइना
    2021/06/07

    एक आइना ही तो है जो सब सच बताता है, हमारे और आपके असली रूप को पहचानता है |

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    1 分
  • परदेसियों का इश्क़
    2021/06/07

    इश्क़ की कोई परिभाषा नहीं होती, और ज़रूरी तो नहीं जो इश्क़ मुक्कमल न हुआ हो वो इश्क़ नहीं ? इस कविता में दो परदेसियों के इश्क़ की दास्ताँ मौजूद है जो अपने इश्क़ को दुनिआ को समझाना चाहते हैं | आइए और जानते है उनका क्या कहना है |

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    2 分
  • कहानी ईमारत की
    2021/06/07

    कुछ इमारतें जो बंज़र हो जाया करती हैं ज़रूरी नहीं की उनकी कहानियां भी बंज़र हो |

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    1 分
  • फुर्सत के वो दिन
    2021/06/07

    इस ज़िन्दगी की भाग दौड़ में दिल की बस एक ही आरज़ू होती है फुरसत के दिन जो इस कविता के द्वारा उल्लेखित की गई है |

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    1 分