अद्वैत का चरम सत्य - आत्मा और ब्रह्म की एकता (Grand Finale)
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कठोपनिषद की इस अंतिम यात्रा में, अद्वैत का सबसे गहरा सत्य प्रकट होता है । यह शरीर ग्यारह द्वारों वाला एक नगर है, जिसमें एक ही चेतना निवास करती है । जो आत्मा हमारे भीतर है, वही इस संपूर्ण ब्रह्मांड में स्पंदित हो रही है । "एको वशी सर्वभूतान्तरात्मा"—वह एक ही चेतना अनेक रूपों में प्रकट होती है । जब यह एकता समझ में आ जाती है, तो तुलना, ईर्ष्या, भय और अकेलापन हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं । वहां न सूर्य चमकता है, न चांद-तारे; उस परम आत्मा के प्रकाश से ही सब कुछ प्रकाशित है । यह ग्रैंड फिनाले हमें हमारी असली पहचान से मिलाता है—हम लहर नहीं, स्वयं सागर हैं ।
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